Lovedeep Kapila

Hello World

Shri Krishna's Devotee Temple

Mar 212018

श्री कृष्ण के चमत्कारों से कौन अवगत नहीं हैं| उनकी सभी कथाएं प्रसिद्ध हैं परन्तु सबसे आश्चर्यजनक कथा है पागल बाबा की| घटना यह थी कि एक बहुत गरीब ब्राह्मण कृष्ण जी को बहुत मानता था| पारिवारिक समस्या के कारण उसे धन की आवश्यकता हुई। तो उसने एक साहूकार से कुछ कर्ज़ लिया|

वह थोड़े थोड़े कर के कर्ज़ चूका रहा था लेकिन आखिरी किश्त देने से पहले ही साहूकार की नियत बदल गयी| उसने ब्राह्मण को कोर्ट का नोटिस भेजा जिसमें लिखा था कि उसने कर्ज़ नहीं चुकाया है, इसलिए पूरी धनराशि ब्याज के साथ साहूकार को वापिस की जाए|

ब्राह्मण बहुत घबरा गया। साहूकार के पास जाकर उसने बहुत विनती की मगर कोई असर नहीं हुआ। फिर कोर्ट में भी ब्राह्मण ने यही कहा कि उसने कर्ज़ की आखिरी किश्त के आलावा सारा ऋण चूका दिया है| जज ने उससे अपनी बात साबित करने के लिए कहा तो उत्तर में उसने दुखी होकर कहा कि बिहारी जी के आलावा कौन जानेगा|

अदालत ने कृष्ण मंदिर में नोटिस भेज दिया| वह नोटिस कृष्ण जी की मूर्ति के आगे रख दिया गया और सभी इस बात को भूल गए| अगली तारिख पर एक बूढ़ा आदमी गवाही देने अदालत पहुंचा जिसने जज को बताया कि उसने ब्राह्मण को कर्ज़ वापिस करते हुए देखा है| उस बूढ़े व्यक्ति ने तारिख, वार, रकम की छोटी से छोटी जानकारी अदालत के सामने रखी|

जज ने आगे की जाँच का आदेश दिया| जाँच में साहूकार के बही-खातों में धनराशि दर्ज थी परन्तु गलत नामों से| जज ने ब्राह्मण को निर्दोष करार कर दिया परन्तु जज को संतुष्टि नहीं मिली| जज के मन में कई सवाल उठ रहे थे जैसे- ब्राह्मण को किसी भी चीज़ का ध्यान नहीं था और उस गवाह को सारी बातें कैसे याद थी जबकि वह काफी बूढ़ा था? या ब्राह्मण के लिए किसी भी व्यक्ति ने गवाही नहीं दी उस बूढ़े व्यक्ति ने उसकी मदद क्यों की?

उसने इन सब सवालों का जवाब जानने के लिए ब्राह्मण को बुलवाया और पूछा की वो गवाह कौन था? ब्राह्मण ने कहा कि वह उस व्यक्ति को नहीं जानता पर बिहारी जी के अलावा और कौन हो सकता है| जज ने हँसते हुए कहा मज़ाक छोड़ो और सच बताओ| ब्राह्मण ने गंभीर हो कर कहा की सच में उसे नहीं पता की वो कौन था|undefined

जज संतुष्ट नहीं हुआ और कृष्ण मंदिर जा पहुंचा| वहां सेवा कर रहे लोगों से इस बारे में पूछा तो उनका कहना ये था की जितने भी पत्र आते हैं वो सब कृष्ण जी की मूर्ति पर चढ़ा दिए जाते हैं और जहाँ तक बूढ़े व्यक्ति की बात है तो यहां कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो गवाही देने गया हो|

जज इस बात को सुन कर बहुत हैरान हो गए| उन्हें पता चल गया था की जो व्यक्ति गवाही देने आया वो कोई और नहीं साक्षात कृष्ण जी थे| इसके बाद उन्होंने अपनी नौकरी और घर-परिवार छोड़कर वृन्दावन में ठाकुर को ढूंढ़ने लगे|

अब जज पागल हो गया, वह भंडारों में जाता और पत्तलों पर से जुठन उठाता। उसमें से आधा जूठ ठाकुर जी की मूर्ति को अर्पित करता आधा खुद खाता। इसे देख कर लोग उसके खिलाफ हो गये और उसे मारते पीटते पर वो ना सुधरा। एक भंडारे में लोगों ने अपनी पत्तलों में कुछ ना छोड़ा ताकि ये पागल ठाकुर जी को जूठ ना खिला सके।undefined

पर उसने फिर भी सभी पत्तलों को पोंछ-पाछकर एक निवाला इकट्ठा किया और अपने मुँह में डाल लिया| जैसे ही उसने निवाला मुँह में डाला उसे ख्याल आया की वो ठाकुर को खिलाना तो भूल ही गया है| उसने वो निवाला अन्दर ना लिया कि अगर पहले मैं खा लूंगा तो ठाकुर का अपमान होगा और थूका तो अन्न का अपमान होगा| तभी एक सुंदर बालक जज के पास आया और बोला क्यों जज साहब आज मेरा भोजन कहाँ हैं?

तब जज ने हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगी और रोने लगे| कृष्ण स्वरुप बालक ने जज को कहा कि रोज़ तू मुझे दूसरों का जूठा खिलाता है आज अपना भी खिला दे| इसे सुन जज पागल हो गया और अपने प्राण वहीं त्याग दिए| तो वही जज पागल बाबा के नाम से जाना गया|

Glimpse of GOD भगवान के दर्शन

Jan 012018

लवली  नामक इंसान भगवान को बहुत मानता था। लेकिन अपने दु:खो से बहुत दुखी रहता था। सोचता था की इतना भगवान को याद करता हूँ, फिर भी दुःख पीछा नहीं छोड़ते। काश कोई सिद्दी होती तो दुखों से छुटकारा हो जाता। एक बार एक सिद्ध पुरुष से उसे एक सात्विक सिद्दी का पता चला। जिसमें 6 महीने तक भगवान की आराधना करनी थी। जिससे उसको भगवान के दर्शन होने थे।

उसने 8 महीनों तक विधिपुवर्क तपस्या की। लेकिन उसको किसी प्रकार की सिद्दी प्राप्त नहीं हुई। अचानक एक दिन जसप्रीत नामक दोस्त से उसकी मुलाकात हुई। मुलाकात के दौरान जसप्रीत ने उसको पल भर में मनचाही वस्तुए मंगवाकर दी। तब लवली ने जसप्रीत से पुछा की यह सब तुमने कैसे संभव किया। जसप्रीत ने कहा की मैंने एक भूत सिद्द किया हुआ है। उसके कारण ही मैं हर चीज पल भर में मंगवा लेता हूँ।undefined

उसको 3 दिन में सिद्द किया जा सकता है। तब लवली ने जसप्रीत से उस विधि का ज्ञान लिया और 3 दिन में उस विधि को किया। लेकिन इस बार भी उसको कोई सिद्दी प्राप्त नहीं हुई। वो बहुत परेशान हुआ और जसप्रीत को आकर मदद करने को कहा। जसप्रीत आया और भूत को याद किया। भूत झट से आ गया। पूछने पर भूत ने बताया की तुम्हारे दोस्त ने जो भागवत सिद्दी की हुई है, उसके कारण उसके शरीर से बहुत ताप निकल रहा है।

जिसके कारण मैं उसके पास जा नहीं पा रहा हूँ। ऐसा सुनकर लवली अपनी तपस्या पर बहुत खुश हुआ। लेकिन उसने अपने दोस्त को भूत से पूछने को कहा की मुझे भगवान् के दर्शन क्यों नहीं हुए ? तब भूत ने बताया की तुम्हारें पिछले कर्मो के कारण तुम्हे दुःख दर्द थे। लेकिन तुम्हारें भगवान में आस्था के कारण तुम उन दुखों को सेहन कर पा रहे थे। तुमने जो भागवत ज्ञान लिया और सिद्दी की उसका असर पिछले कर्मो के दुखों को ख़तम करने में चला गया। यदि तुम थोड़े समय और तपस्या करते तो तुम्हे भगवान के दर्शन भी हो जाते और तुम सुखी भी रहने लगते। मगर तुम्हारें दुखों के कारण ही तुममें सब्र खत्म हो चूका है।

यदि इंसान भगवान से यह कहे की, हे भगवान सभी के लिए जो उत्तम हो वो करों, तो कभी दुःख न आये। मैं भी अपने लिए सुख और दूसरों के लिए दुःख मांगता था। तभी मेरी मृत्यु के बाद मुझे प्रेत योनी मिली है। और मैं इंसानों के मल-मूत्र पर अपना निर्वाह कर रहा हूँ। मैं अब जा रहा हूँ, मुझसे अब और ताप सेहन नहीं हो रहा। ऐसा कहकर भूत भाग गया। फिर अगले 6 हफ़्तों में ही लवली को अपनी सिद्दी में सफलता मिल गयी और भगवान के दर्शन हो गए। 

Atom

Powered by Lovedeep Kapila